Report: Pankaj Singh
श्री विजयापुरम- सांसद श्री बिष्णु पदा राय ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व प्रेषित कर ग्रेट निकोबार इंफ्रास्ट्रक्चर (GNI) परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से प्रभावित गांधी नगर एवं शास्त्री नगर के परिवारों के लिए न्यायसंगत, पारदर्शी एवं मानवीय पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) पैकेज सुनिश्चित करने हेतु तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
अपने पत्र में श्री राय ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित परिवार देश की सामरिक एवं राष्ट्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रेट निकोबार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। वे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सफल क्रियान्वयन में सरकार के साथ पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी केवल यह मांग है कि भूमि अधिग्रहण, मुआवजा तथा पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया “भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (RFCTLARR Act, 2013)” के प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष एवं विधिसम्मत तरीके से संपन्न की जाए।
श्री राय ने अपने प्रतिनिधित्व में उल्लेख किया है कि अधिकांश प्रभावित परिवार पूर्व सैनिक बसावट (Ex-servicemen Settlers) से संबंधित हैं, जिन्हें वर्ष 1970 के दशक में राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामरिक दृष्टि से ग्रेट निकोबार में बसाया गया था। ये परिवार वर्ष 2004 की सुनामी सहित कई बार विस्थापन का दर्द झेल चुके हैं तथा अब प्रस्तावित परियोजना के कारण तीसरी बार अपने घर, कृषि भूमि, बागानों एवं आजीविका से विस्थापित होने की स्थिति में हैं। इसलिए उनके साथ विशेष मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना में प्रभावित परिवारों को केवल न्यूनतम वैधानिक मुआवजे तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनके असाधारण योगदान, दशकों की कठिन परिस्थितियों में सीमावर्ती क्षेत्र में निवास तथा बार-बार हुए विस्थापन को ध्यान में रखते हुए अधिक उदार एवं विशेष पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाना चाहिए।
श्री राय ने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों द्वारा सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment) रिपोर्ट पर प्रस्तुत आपत्तियों एवं दावों का अभी तक विधिसम्मत रूप से निस्तारण नहीं किया गया है। यदि इन वैधानिक प्रक्रियाओं को पूर्ण किए बिना आगे बढ़ा जाता है तो भविष्य में अनावश्यक विवाद उत्पन्न होने तथा परियोजना के क्रियान्वयन में विलंब की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने प्रभावित परिवारों की ओर से निम्न प्रमुख मांगों का उल्लेख किया है—
- भूमि एवं अन्य परिसंपत्तियों का उचित एवं वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा।
- भूमि के बदले भूमि की व्यवस्था।
- आवास के बदले आवास अथवा उपयुक्त आवासीय भूखंड।
- बागानों, फसलों एवं आजीविका की हानि का समुचित प्रतिकर।
- प्रत्येक पात्र परिवार के वयस्क सदस्य को रोजगार अथवा आजीविका की स्थायी व्यवस्था।
- बार-बार हुए विस्थापन की विशेष मान्यता।
- पुनर्वास स्थल पर सभी आवश्यक नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता।
श्री राय ने अपने पत्र में यह भी इंगित किया है कि वर्तमान में प्रस्तावित पुनर्वास पैकेज भूमि मूल्यांकन के लिए वर्ष 2000 की पुरानी सर्किल दरों पर आधारित है, जिससे प्रभावित किसानों एवं भू-स्वामियों को उचित एवं न्यायोचित मुआवजा मिलने की संभावना अत्यंत कम है। उन्होंने सुझाव दिया है कि वर्ष 2006 की सुनामी पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान निर्धारित भूमि मूल्य तथा उसके बाद की मूल्यवृद्धि एवं वैधानिक लाभों को भी मुआवजा निर्धारण का महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देश के विभिन्न राज्यों में विकसित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों की तुलना में ग्रेट निकोबार परियोजना के लिए प्रस्तावित पुनर्वास पैकेज अपेक्षाकृत कमज़ोर एवं अपर्याप्त प्रतीत होता है, जबकि यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा, समुद्री सामरिक क्षमता एवं आर्थिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्री राय ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में बड़े सार्वजनिक परियोजनाओं से पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ मंत्री स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों से संवाद स्थापित करते हैं तथा उनका विश्वास जीतते हैं। इसके विपरीत, ग्रेट निकोबार में अब तक केंद्रशासित प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर से प्रभावित परिवारों के साथ प्रत्यक्ष संवाद नहीं होने के कारण उनमें असुरक्षा एवं असंतोष की भावना बढ़ी है।
उन्होंने स्मरण कराया कि इस विषय में वे पूर्व में भी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, उपराज्यपाल एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को कई विस्तृत ज्ञापन भेज चुके हैं। साथ ही, जनवरी 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अंडमान यात्रा के दौरान भी उन्होंने यह विषय उनके समक्ष रखा था, जिस पर गृह मंत्री ने प्रभावित परिवारों को न्यायोचित मुआवजा एवं बेहतर पुनर्वास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए श्री बिष्णु पदा राय ने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में शीघ्र एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाए, जिसमें अंडमान एवं निकोबार प्रशासन, सांसद, प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधि तथा उनकी समिति के सदस्य शामिल हों। इस बैठक में सभी पक्षों की बात सुनकर ऐसा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पैकेज तैयार किया जाए जो न्यायसंगत, मानवीय, विधिसम्मत एवं सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।
श्री राय ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रभावित परिवारों की वास्तविक एवं न्यायोचित मांगों का सम्मानपूर्वक समाधान किया जाता है तो वे पूर्ण सहयोग के साथ इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना को समयबद्ध एवं बिना किसी अनावश्यक विवाद या न्यायिक बाधा के सफल बनाने में सरकार का साथ देंगे।















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