Editor: Pankaj Singh
श्री विजयपुरम- अंडमान और निकोबार प्रशासन के मुख्य सचिव ने ‘राज्य पशु रोग आपातकालीन समिति’ (SADEC) की एक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ (ASF) की पुष्टि के बाद पैदा हुई स्थिति की समीक्षा करना था। समिति ने बीमारी को रोकने, निगरानी रखने, अधिकृत रूप से संक्रमित जानवरों को मारने (culling), मरे हुए सूअरों के शवों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने और संक्रमण से मुक्त क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए समन्वित उपायों पर चर्चा की।
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे इस प्रकोप को एक आपदा मानें और भारत सरकार द्वारा जारी ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ को नियंत्रित करने, रोकने और खत्म करने के लिए ‘राष्ट्रीय कार्य योजना’ (नेशनल एक्शन प्लान) का सख्ती से पालन करें। उन्होंने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिया कि वे निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को लागू करें और जिला प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल सुनिश्चित करें।
संक्रमण के जिन मुख्य केंद्रों की सूचना मिली है, उनमें कार निकोबार का अरोन्ग, तथा म्युनिसिपल क्षेत्र के प्रेम नगर और ब्रुकशाबाद शामिल हैं।
इसी समस्या को गंभीर से लेते हुए उत्तर और मध्य अंडमान प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है, और ज़रूरी कदम उठा रही है।
इस बीच, भारत सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय तकनीकी टीम, जिसका नेतृत्व पशुपालन आयुक्त कर रहे हैं, आज इन द्वीपों पर पहुंची। पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग (AH&VS) की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यहां पहुंचने पर आयुक्त और उनके अधिकारियों की टीम ने स्थिति का जायजा लिया और वे तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं।
















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