Report : Pankaj Singh
रंगत, 15 जून 2026- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 और चल रहे नशा मुक्ति अभियान के तहत, 13 जून 2026 को सुबह 5:30 बजे अटल बिहारी वाजपेयी (ABV) पंचायत हॉल, रंगत में जागरूकता सत्र, योग और ध्यान सत्र आयोजित किया गया। शुरुआत में, कार्यक्रम के समन्वयक और CHC रंगत के मेडिकल ऑफिसर (होम्योपैथी) डॉ. बी. बिंदु कुमार ने सभी का स्वागत किया।
मध्य अंडमान, रंगत के असिस्टेंट कमिश्नर श्री दीपांशु वोहरा ने NCORD तंत्र के तहत किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और लोगों, खासकर युवाओं को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने, नियमित रूप से योग करने और तंबाकू, शराब, ड्रग्स व अन्य हानिकारक नशों से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्य वक्ता, डॉ. आर.पी. डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, मायाबंदर की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आथिरा जे. प्रकाश ने एक इंटरैक्टिव जागरूकता सत्र आयोजित किया। इसमें मानसिक स्वास्थ्य, भावनाओं पर नियंत्रण, आत्म-जागरूकता और तनाव का सही तरीके से सामना करने में योग और माइंडफुलनेस की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तनाव जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन लोग तनाव पर जिस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, उसका उनके मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण पर गहरा असर पड़ता है।
सत्र में उन आम कारणों पर चर्चा की गई जिनकी वजह से लोग नशीले पदार्थों का सेवन शुरू करते हैं, जैसे कि जिज्ञासा, दोस्तों का दबाव, तनाव, भावनात्मक परेशानी, सामाजिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी छिपी हुई समस्याएं। प्रतिभागियों को नशे की लत के शुरुआती संकेतों के बारे में जानकारी दी गई, जैसे कि सेवन पर नियंत्रण खोना, सेवन को छिपाना, अपराधबोध महसूस करना, तीव्र इच्छा (cravings), बढ़ती निर्भरता, जिम्मेदारियों की अनदेखी, व्यवहार में बदलाव और परिवार व सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना।
डॉ. आथिरा ने नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी समस्याओं और उनके इलाज के बारे में फैली कई गलतफहमियों को दूर किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नशा कोई नैतिक कमी नहीं, बल्कि एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसका इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि प्रोफेशनल मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत और आत्म-जागरूकता की निशानी है। साथ ही, उन्होंने सबूत-आधारित इलाज के तरीकों पर भी चर्चा की, जिनमें व्यवहार थेरेपी, परिवार का सहयोग और उचित मेडिकल इलाज शामिल हैं।
व्यवहार संबंधी लत (behavioral addictions), खासकर स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल और डिजिटल निर्भरता पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को व्यावहारिक तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जैसे कि स्क्रीन-टाइम की सीमा तय करना, डिवाइस-फ्री समय रखना, शारीरिक गतिविधियों और शौक में शामिल होना, आमने-सामने की बातचीत को बेहतर बनाना, और आत्म-नियंत्रण व डिजिटल वेल-बीइंग के लिए माइंडफुलनेस और योग का अभ्यास करना।
इस सत्र में लत को रोकने और रिकवरी को बढ़ावा देने के लिए शुरुआती हस्तक्षेप, परिवार के सहयोग और सामुदायिक जागरूकता के महत्व पर जोर दिया गया। CHC रंगत के मेडिकल ऑफिसर (होम्योपैथी) डॉ. बी. बिंदु कुमार ने नशा मुक्ति अभियान और विश्व तंबाकू निषेध दिवस के उद्देश्यों के साथ-साथ एक स्वस्थ और नशा-मुक्त समाज बनाने में सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तंबाकू के इस्तेमाल और निकोटीन की लत के बोझ पर भी जोर दिया और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के नतीजों पर चर्चा की, जिनमें स्वास्थ्य पर इनके बुरे प्रभावों को उजागर किया गया था।
योग और ध्यान सत्र का संचालन CHC रंगत के योग प्रशिक्षक श्री अजीत कुमार दास और APWD रंगत के असिस्टेंट इंजीनियर व वॉलंटियर ट्रेंड योग टीचर (आर्ट ऑफ लिविंग) श्री संदीप प्रसाद ने किया। प्रतिभागियों ने शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से योग अभ्यास, सांस लेने के व्यायाम और ध्यान तकनीकों में सक्रिय रूप से भाग लिया।
इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, शिक्षकों, छात्रों, युवा स्वयंसेवकों, स्वास्थ्य कर्मियों और आम जनता ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। योग, ध्यान और जागरूकता सत्र में कुल 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जो नशा मुक्ति अभियान के उद्देश्यों और एक स्वस्थ, नशा-मुक्त समाज को बढ़ावा देने के लिए मजबूत सामुदायिक समर्थन को दर्शाता है।
यह कार्यक्रम उत्तर और मध्य अंडमान जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया था और यह नशा मुक्ति अभियान तथा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में पूरे जिले में चलाई जा रही गतिविधियों का हिस्सा था। कार्यक्रम का समापन मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, स्वस्थ जीवन शैली अपनाने, नियमित रूप से योग करने, तंबाकू, शराब, नशीले पदार्थों और अन्य प्रकार की लतों से दूर रहने और एक स्वस्थ, खुशहाल और नशा-मुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।















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