Editor: Sangita Singh
रंगत- 31 जुलाई 2026 को सामग्र शिक्षा के अंतर्गत समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) कार्यक्रम के तहत ब्लॉक परियोजना कार्यालय (BPO), रंगत द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी सभागार, रंगत में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs – CWSN) के लिए दिव्यांगता पहचान एवं चिकित्सीय मूल्यांकन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), रंगत की चिकित्सा टीम ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए बच्चों के स्वास्थ्य एवं दिव्यांगता के व्यापक मूल्यांकन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में दिव्यांगता की शीघ्र पहचान, समग्र चिकित्सीय मूल्यांकन तथा बहु-विषयक (Multidisciplinary) दृष्टिकोण के माध्यम से उन्हें उपयुक्त शैक्षणिक एवं पुनर्वास संबंधी सेवाओं से जोड़ना था, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं एवं समावेशी शिक्षा का लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

शिविर में CHC, रंगत की चिकित्सा टीम में डॉ. बी. बिंदु कुमार द्वारा बच्चों की दिव्यांगता का प्रारंभिक चिकित्सीय मूल्यांकन किया गया। डॉ. पी. मनोज, दंत शल्य चिकित्सक ने श्री जगदीश कुमार, दंत तकनीशियन के सहयोग से बच्चों की विस्तृत दंत स्वास्थ्य जांच की। वहीं श्रीमती वसंती, नेत्र सहायक द्वारा बच्चों की दृष्टि जांच करते हुए अपवर्तक दोष (Refractive Errors) एवं अन्य नेत्र संबंधी समस्याओं की स्क्रीनिंग की गई।
इस अवसर पर टीम ने ALIMCO के ऑडियोलॉजिस्ट तथा प्रोस्थेटिस्ट एवं ऑर्थोटिस्ट के साथ समन्वय स्थापित करते हुए कार्य किया। विशेषज्ञों द्वारा किए गए मूल्यांकन के आधार पर बच्चों की आवश्यकतानुसार सहायक उपकरण (Assistive Devices) एवं पुनर्वास सेवाओं की जरूरत का आकलन किया गया।
शिविर से लगभग 74 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) लाभान्वित हुए। उन्हें दिव्यांगता का समग्र चिकित्सीय मूल्यांकन, सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण, दंत परीक्षण, नेत्र जांच तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप चिकित्सीय एवं पुनर्वास संबंधी परामर्श प्रदान किया गया।
यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभागों के प्रभावी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण रहा, जिसने दिव्यांग बच्चों के लिए शीघ्र पहचान, दिव्यांगता प्रमाणन, पुनर्वास सेवाओं तथा समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पहल से रंगत ब्लॉक के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक सार्थक कदम सुनिश्चित हुआ।















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