Editor: Sangita Singh
रंगत, 31 अगस्त 2026: मत्स्य उप-केंद्र, रंगत, मत्स्य विभाग, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर एवं मध्य अंडमान के रंगत तहसील के दशरथपुर गांव में “मीठे पानी में प्रेरित प्रजनन एवं मछली बीज प्रबंधन” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक मीठे पानी के मछली पालन को बढ़ावा देना तथा क्षेत्र के मत्स्य किसानों एवं भावी जलीय कृषि उद्यमियों की तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना था।
ATMA कार्यक्रम कृषि, मछली पालन एवं पशुपालन के क्षेत्रों में तकनीकी हस्तक्षेप, विस्तार गतिविधियों तथा क्षमता निर्माण पहलों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के सचिव (मत्स्य, कृषि एवं पशु चिकित्सा विज्ञान) के निर्देशों के अनुरूप, चालू वित्तीय वर्ष से संबंधित विभागों को ATMA के तहत धनराशि आवंटित की गई है, ताकि प्रशिक्षण, प्रदर्शनियों एवं अन्य क्षमता निर्माण गतिविधियों सहित क्षेत्र-विशिष्ट विस्तार कार्यक्रमों का कार्यान्वयन किया जा सके।
दशरथपुर गांव एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में मीठे पानी के मछली पालन की पर्याप्त संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पड़ोसी गांवों के 50 से अधिक किसानों एवं भावी जलीय कृषि उद्यमियों ने कार्यक्रम में भाग लिया तथा तकनीकी सत्रों एवं व्यावहारिक प्रदर्शनों के दौरान विषय विशेषज्ञों के साथ सक्रिय रूप से संवाद किया।

कार्यक्रम में उप निदेशक मत्स्य, उत्तर अंडमान; विषय विशेषज्ञ (मत्स्य), ICAR-कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), निंबुदेरा; तथा बिल्लीग्राउंड एवं रंगत स्थित मत्स्य उप-केंद्रों के मत्स्य निरीक्षक एवं मत्स्य उप-निरीक्षक उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान मीठे पानी में मछली पालन के विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं को शामिल किया गया, जिसमें विशेष रूप से प्रेरित प्रजनन, मत्स्य बीज उत्पादन तथा मीठे पानी के तालाबों का वैज्ञानिक प्रबंधन प्रमुख रहा।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण प्रेरित प्रजनन तकनीकों एवं वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन पद्धतियों का व्यावहारिक प्रदर्शन था। प्रतिभागी किसानों को ब्रूड मछलियों के चयन, प्रेरित प्रजनन, मत्स्य बीज उत्पादन, तालाब की तैयारी एवं प्रबंधन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, आहार प्रबंधन, मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन तथा सफल मीठे पानी के मत्स्य पालन के अन्य आवश्यक घटकों के संबंध में व्यावहारिक जानकारी एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने किसानों को धीरे-धीरे मत्स्य बीज उत्पादन एवं प्रभावी मछली आहार प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता पर बल दिया। यह बताया गया कि मछली बीज उत्पादन, मछली आहार प्रबंधन एवं मीठे पानी का मछली पालन उत्तर एवं मध्य अंडमान में लाभकारी उद्यम एवं सतत आजीविका के अवसर के रूप में विकसित होने की महत्वपूर्ण संभावनाएं रखते हैं। वैज्ञानिक मछली पालन पद्धतियों को अपनाने से स्थानीय स्तर पर मछली की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने तथा ग्रामीण आबादी के लिए अतिरिक्त आजीविका एवं रोजगार के अवसर सृजित करने में सहायता मिल सकती है।
कार्यक्रम में सफल एवं मॉडल मत्स्य किसानों/जलीय कृषि उद्यमियों के साथ संवाद का अवसर भी प्रदान किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए। उनके अनुभवों एवं उपलब्धियों ने किसानों, मछुआरों तथा भावी जलीय कृषि समूहों को वैज्ञानिक मछली पालन, मछली बीज उत्पादन एवं प्रेरित प्रजनन को संभावित आजीविका एवं उद्यमशीलता गतिविधियों के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस संवाद से यह स्पष्ट हुआ कि वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिए मीठे पानी का मछली पालन एक सतत आय-सृजन गतिविधि के रूप में व्यापक संभावनाएं रखता है।
कार्यक्रम के समापन दिवस पर प्रतिभागी किसानों को उनके संबंधित फार्मों पर वैज्ञानिक मछली पालन पद्धतियों को अपनाने एवं जारी रखने के लिए मत्स्य आहार सहित आवश्यक जलीय कृषि इनपुट भी प्रदान किए गए।















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