स्थानीय निवासियों की मांग पर प्रशासन ने तुगापुर, मायाबंदर में स्टील ब्रिज के निर्माण को मंज़ूरी दी

Steel Bridge

Editor: Sangita Singh

मायाबंदर– अंडमान और निकोबार प्रशासन ने मायाबंदर के तुगापुर नंबर-7 में श्री अमूल्य बेपारी के घर के समीप एक स्टील ब्रिज के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण परियोजना पर लगभग ₹5 करोड़ 91 लाख 78 हजार 968 रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित पुल का निर्माण 12 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

तुगापुर नंबर-7 और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों तथा स्थानीय PRI प्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से इस स्थान पर पुल निर्माण की मांग की जा रही थी। प्रारंभ में यहां केवल पैदल यात्रियों के लिए फुट ब्रिज बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन था। हालांकि, स्थानीय निवासियों ने लगातार मांग की कि पुल ऐसा हो, जिस पर वाहनों की आवाजाही भी संभव हो।

इसी मांग को लेकर 14 मई 2025 को तुगापुर नंबर-7 में सामुदायिक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के माननीय सांसद, PRI प्रतिनिधि तथा APWD के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान क्षेत्र में आवागमन और कनेक्टिविटी से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई और ग्रामीणों की आवश्यकताओं को देखते हुए वाहनों के आवागमन योग्य स्टील ब्रिज के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

Steel Bridge

जन-प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेते हुए इस मामले को अंडमान और निकोबार प्रशासन के समक्ष आगे बढ़ाया गया। इसके बाद प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी प्रदान की।

प्रस्तावित स्टील ब्रिज के निर्माण से तुगापुर नंबर-7 सहित आसपास के क्षेत्रों में आवागमन और सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। पुल के बनने से स्थानीय लोगों को वाहनों के आवागमन में सुविधा मिलेगी और मायाबंदर क्षेत्र के ग्रामीण सड़क नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी।

परियोजना के तहत अप्रोच रोड का निर्माण, स्टील ब्रिज के विभिन्न हिस्सों का निर्माण एवं आपूर्ति, पुल की स्थापना (इंस्टॉलेशन) तथा इसे पूरी तरह चालू करने के लिए आवश्यक अन्य सिविल और स्ट्रक्चरल कार्य किए जाएंगे।

इस परियोजना की मंजूरी तुगापुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की लंबे समय से चली आ रही कनेक्टिविटी संबंधी मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल स्थानीय आवागमन सुगम होगा, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के लोगों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध हो सकेगा।

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