Editor: Pankaj Singh
श्री विजयपुरम- अंडमान और निकोबार प्रशासन के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग (AH&VS) ने ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ (ASF) को फैलने से रोकने के लिए चल रहे प्रयासों के तहत, पूरे द्वीप समूह में जागरूकता, परामर्श, जैव-सुरक्षा (बायोसिक्योरिटी) और स्वच्छता संबंधी गतिविधियों को तेज कर दिया है। ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ सूअरों में होने वाली एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह इंसानों में नहीं फैलती है और इससे मानव स्वास्थ्य को कोई सीधा खतरा नहीं है। इसके लिए कोई वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए सख्त जैव-सुरक्षा, आवाजाही पर नियंत्रण और समय रहते इसकी सूचना देना ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।
सूअर पालने वाले किसानों को फार्म की साफ-सफाई, कीटाणुशोधन (disinfection), बाहरी लोगों के आने पर रोक, आवाजाही पर नियंत्रण, बीमारी की जल्द सूचना देने और अन्य जैव-सुरक्षा (biosecurity) उपायों के बारे में सलाह दी गई है। कई जगहों पर जागरूकता बैठकें और शिविर आयोजित किए गए हैं। लिटिल अंडमान के आर. के. पुर में, पंचायत हॉल में एक जागरूकता बैठक हुई, जिसमें सूअर पालक किसानों, पशु सखियों, स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। स्वास्थ्य विभाग और ‘केया फाउंडेशन’ (Keya Foundation) एनजीओ के प्रतिनिधि भी वहां मौजूद थे। हट बे (Hut Bay) में, रेंज कार्यालय में एक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इसमें बीमारी के प्रकार, इसके फैलने के तरीके और इससे बचाव के उपायों के बारे में बताया गया। साथ ही, अंडमान के जंगली सूअरों (Andaman Wild Pig) के संपर्क में आते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर विशेष जोर दिया गया। इस शिविर में हट बे रेंज और AFEVS यूनिट के कर्मचारियों सहित कुल 50 लोगों ने भाग लिया।
24 अक्टूबर को टेरेसा द्वीप के GSSS बंगाली में ASF जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। डिगलीपुर, आर. के. ग्राम और सुभाषग्राम में घर-घर जाकर जागरूकता शिविर लगाए गए। आर. के. पुर में सैनिटाइजेशन का काम भी किया गया।

26 अक्टूबर को छोटा एनाका में, फर्स्ट कैप्टन की मौजूदगी में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 25 लोगों ने हिस्सा लिया। ओंगी टिकेरी स्थित सुनामी शेल्टर में 22 लोगों के बीच जागरूकता फैलाई गई; इनमें मुख्य रूप से हायर सेकेंडरी के छात्र, स्थानीय सुअर पालक और पीआरआई (PRI) सदस्य शामिल थे। वहां इस जागरूकता गतिविधि को जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
कई जगहों पर सामान और यात्रियों को सैनिटाइज़ किया गया है। कल MV नालंदा और MV सेंटिनल से आए सामान और यात्रियों को सैनिटाइज़ किया गया था। आज MV रानीचंगा से आए सामान और यात्रियों को सैनिटाइज़ किया गया। चौड़ा जेटी पर जाने वाले यात्रियों के हाथ और पैर सैनिटाइज़ किए गए। आज MV कालीघाट से आने वाले यात्रियों को भी सैनिटाइज़ किया गया। कैंपबेल बे में, आज हेलीकॉप्टर से जाने और आने वाले लोगों के सामान और उन्हें खुद भी अच्छी तरह से सैनिटाइज़ किया गया।
कई पंचायत कार्यालयों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के बारे में पोस्टर लगाए गए हैं। विभाग इन द्वीपों पर जागरूकता, निगरानी और बायोसिक्योरिटी (जैव-सुरक्षा) के उपाय जारी रखे हुए है। सुअर पालकों से अनुरोध है कि वे अपने सुअरों को एक ही जगह पर रखें, साफ-सफाई का ध्यान रखें, बाहरी लोगों का आना-जाना सीमित करें, किसी भी असामान्य बीमारी या मौत की तुरंत सूचना दें, और सुअरों, सुअर के मांस तथा उससे बने उत्पादों की आवाजाही पर लगी रोक का सख्ती से पालन करें। पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग (AH&VS) की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आम जनता को घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह बीमारी इंसानों को प्रभावित नहीं करती है।















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