उत्तर एवं मध्य अंडमान की समस्याओं को लेकर उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

Dr Dinesh Sharma

Editor: Pankaj Singh

श्री विजयपुरम- उत्तर एवं मध्य अंडमान जिले में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने, आवश्यक सेवाओं में सुधार तथा आम लोगों की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्राम पंचायत स्वदेश नगर के प्रधान एवं जिला पंचायत राज संस्थान (PRIs) एसोसिएशन, उत्तर एवं मध्य अंडमान के महासचिव देबब्रत दास ने उपराज्यपाल, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व सौंपा है। प्रतिनिधित्व में जिले की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुल 26 प्रमुख मुद्दों पर प्रशासनिक एवं नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की गई है।

प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि उत्तर एवं मध्य अंडमान की भौगोलिक स्थिति, कठिन भू-भाग, सीमित कनेक्टिविटी, जीवन-यापन की ऊंची लागत तथा तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी के कारण यहां के लोगों को विशिष्ट कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पंचायत राज संस्थाओं को स्थानीय स्तर पर विकास और जनसेवा के लिए पर्याप्त अधिकार एवं संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है।

प्रतिनिधित्व में पंचायत राज संस्थाओं को संविधान के अनुरूप कार्य, अधिकार, कर्मचारी और वित्तीय संसाधनों का प्रभावी हस्तांतरण सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही वर्ष 2025 के Grant-in-Aid to Panchayat Raj Institutions Rules के मसौदे पर पंचायतों द्वारा प्रस्तुत आपत्तियों एवं सुझावों पर व्यापक विचार करने का अनुरोध किया गया है।

GPDP, Utilization Certificate तथा Grant-in-Aid की प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को कम करने की भी मांग की गई है। प्रतिनिधित्व के अनुसार प्रक्रियात्मक विलंब के कारण वित्तीय वर्ष में उपलब्ध समय कम हो जाता है और ग्राम सभा द्वारा चिन्हित कई आवश्यक कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाते।

आपात परिस्थितियों में सार्वजनिक संपत्ति, आधारभूत संरचना अथवा मानव जीवन की सुरक्षा के लिए प्रधानों को निर्धारित वित्तीय एवं नियामक व्यवस्था के अंतर्गत सीमित आपात अधिकार देने तथा बाद में रिपोर्टिंग, अनुमोदन और ऑडिट की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है।

प्रतिनिधित्व में उन पुराने सार्वजनिक परिसंपत्तियों की पहचान और औपचारिक मान्यता की मांग की गई है, जिनके निर्माण से संबंधित पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे परिसंपत्तियों के स्वामित्व और रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं होने के कारण उनकी मरम्मत एवं रखरखाव में पंचायतों को कठिनाई होती है। इसलिए सत्यापन के बाद उन्हें पंचायत या संबंधित सरकारी विभाग की परिसंपत्ति के रूप में दर्ज करने का सुझाव दिया गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के लिए केवल आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ एप्रोच रोड, बिजली कनेक्शन और घरेलू नल जल कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी प्राथमिकता देने की मांग की गई है। प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि आवश्यक कनेक्टिविटी और सेवाओं के अभाव में आवास योजना का पूरा लाभ लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पाता।

छोटे लेकिन महत्वपूर्ण ग्रामीण कार्यों के लिए स्थानीय सहकारी समितियों, पंजीकृत एजेंसियों या अन्य उपयुक्त संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से काम कराने का सुझाव भी दिया गया है, क्योंकि छोटे कार्य बड़े ठेकेदारों के लिए व्यावसायिक रूप से आकर्षक नहीं होने के कारण लंबित रह जाते हैं।

मायाबंदर स्थित पंचायतों के इंजीनियरिंग विंग में पर्याप्त अधिकारी एवं कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग की गई है। प्रतिनिधित्व में ड्राइंग एवं डिजाइन, अनुमान तैयार करने, रेट एनालिसिस, तकनीकी जांच, निविदा जांच, साइट सुपरविजन और योजना संबंधी कार्यों के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई है।

इंजीनियरिंग विंग के कर्मचारियों तथा VB-G RAM G के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों एवं अधिकारियों के पारिश्रमिक की समय-समय पर समीक्षा कर महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के अनुरूप संशोधन की मांग भी की गई है।

अंतर-द्वीपीय क्षेत्रों से इलाज के लिए श्री विजयपुरम आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए सस्ती एवं समुचित अस्थायी आवास सुविधा उपलब्ध कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। इसमें रेफर किए गए मरीजों के साथ आने वाले परिजन, विशेष चिकित्सा की आवश्यकता वाली गर्भवती महिलाएं, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपचार के लिए आने वाले लोग तथा अन्य मरीजों के परिवारों को लाभ मिलने की बात कही गई है।

प्रतिनिधित्व में बिलिग्राउंड जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने की मांग की गई है। व्यवहार्यता के आधार पर चयनित PHC में डायलिसिस, अल्ट्रासाउंड/डायग्नोस्टिक स्कैनिंग, मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त कक्ष तथा अन्य नियमित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।

Dr Dinesh Sharma

बिजली विभाग के बेटापुर, निंबूदेरा सहित अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों को क्रेन-माउंटेड उपयोगिता वाहन उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि बिजली के खंभों, उपकरणों और आपातकालीन मरम्मत कार्यों को समय पर पूरा किया जा सके।

मायाबंदर स्थित महात्मा गांधी राजकीय महाविद्यालय में BBA, MBA सहित रोजगारोन्मुखी एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया गया है। प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि इससे स्थानीय युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है तथा रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर बढ़ सकते हैं।

उत्तर एवं मध्य अंडमान में LPG सिलेंडरों की नियमित और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा दूरदराज के क्षेत्रों में संभावित कमी को रोकने के लिए डिपो/वितरण व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग भी की गई है।

प्रतिनिधित्व में मायाबंदर और डिगलीपुर के लिए कोलकाता यात्री-सह-कार्गो जहाज सेवा को नियमित और विश्वसनीय रूप से संचालित करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि नियमित समुद्री संपर्क यात्रियों के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं, कृषि उत्पादों और अन्य माल की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण है।

वृद्धावस्था पेंशन सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए निर्धारित परिवार की आय सीमा की समीक्षा की मांग की गई है। प्रतिनिधित्व में वर्तमान सीमा लगभग ₹24,000 प्रति माह होने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में आवश्यक वस्तुओं, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत को देखते हुए इस सीमा पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

PRI Engineering Wing के लिए District Schedule of Rates (DSR) को अधिक व्यापक बनाने की मांग की गई है, ताकि पंचायतों की नई और स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े कार्यों को उसमें शामिल किया जा सके। इसके अलावा सरकारी भूमि के अनियंत्रित कब्जे को रोकने तथा भूमि के नियोजित और वैध उपयोग के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा/पुनः सक्रिय करने का सुझाव दिया गया है।

स्थानीय, OBC तथा पहचान/निवास संबंधी प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले संबंधित क्षेत्रों के सत्यापित सेटलर रिकॉर्ड का संदर्भ लेने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी की गई है।

स्थानीय अंतर-द्वीपीय फेरी नौकाओं में आधुनिक सुविधाएं, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि द्वीपों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन मिलना आवश्यक है।

प्रतिनिधित्व में पात्र स्थानीय द्वीपवासियों के रोजगार एवं शिक्षा संबंधी अवसरों को ध्यान में रखते हुए एक उपयुक्त डोमिसाइल/रेजिडेंसी फ्रेमवर्क पर विचार करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट की नीति की समीक्षा कर उच्च शिक्षा, पेशेवर योग्यता, मान्यता प्राप्त कौशल और प्रासंगिक अनुभव को ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा अंडमान एवं निकोबार के लिए Public Service Commission अथवा उपयुक्त संवैधानिक/वैधानिक भर्ती व्यवस्था स्थापित करने की संभावना पर विचार करने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रतिनिधित्व में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के लिए पुडुचेरी जैसे केंद्रशासित प्रदेशों में लागू संवैधानिक/वैधानिक व्यवस्था की तर्ज पर उपयुक्त प्रतिनिधि विधानसभा अथवा विधायी संस्था की संभावना पर विचार करने का अनुरोध भी किया गया है। इसमें कहा गया है कि ऐसी प्रतिनिधि संस्था के माध्यम से द्वीपसमूह की विशिष्ट विकासात्मक, आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक आवश्यकताओं पर चर्चा के लिए अतिरिक्त लोकतांत्रिक मंच उपलब्ध हो सकता है।

प्रतिनिधित्व के अंत में उपराज्यपाल से इन मुद्दों का संज्ञान लेने, संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को प्रत्येक विषय की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने, उत्तर एवं मध्य अंडमान की पंचायतों के प्रतिनिधियों के साथ आवश्यक परामर्श आयोजित करने तथा अनावश्यक प्रशासनिक एवं प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए उचित निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि ये मुद्दे केवल अलग-अलग मांगें नहीं हैं, बल्कि स्थानीय स्वशासन, आवश्यक सेवाओं, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा, आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा और जिले के दीर्घकालिक विकास से सीधे जुड़े हैं। पंचायत राज संस्थाओं ने प्रशासन के साथ पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित विकास के लिए रचनात्मक सहयोग की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की है।

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