Editor: Pankaj Singh
मायाबंदर– उत्तर एवं मध्य अंडमान जिले की ग्राम पंचायत हरिनगर में पिछले तीन से चार महीनों से रसोई गैस (LPG) सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित रहने के कारण ग्रामीण परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, हाल ही में कंज्यूमर्स कोऑपरेटिव स्टोर्स (CCS) लिमिटेड द्वारा क्षेत्र में सिलेंडरों का वितरण दोबारा शुरू किया गया है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बंद रहने के कारण अधिकांश परिवारों के दोनों गैस सिलेंडर खाली हो चुके हैं।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए ग्राम पंचायत हरिनगर के प्रधान ने मायाबंदर उपमंडल के सहायक आयुक्त को पत्र लिखकर ग्रामीणों को दूसरे खाली सिलेंडर की रिफिलिंग की अनुमति देने तथा गैस संकट के समाधान के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
पत्र में बताया गया है कि लंबे समय तक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित रहने के कारण पंचायत क्षेत्र के परिवारों के पास उपलब्ध दोनों सिलेंडर खाली हो गए हैं। ऐसे में घरेलू रसोई गैस की कमी से ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है। हाल ही में वितरण शुरू होने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन CCS के वितरण कर्मचारियों द्वारा प्रत्येक उपभोक्ता को केवल एक ही रिफिल किया हुआ सिलेंडर दिया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि एक साथ दो सिलेंडरों की रिफिलिंग करना निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है।

प्रधान के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में एक सिलेंडर मिलने से परिवारों की तत्काल रसोई संबंधी जरूरतें तो पूरी हो सकती हैं, लेकिन दूसरा सिलेंडर खाली रहने के कारण भविष्य में आपूर्ति में दोबारा देरी होने की आशंका बनी हुई है। इससे ग्रामीण परिवारों में चिंता बढ़ रही है।
इस समस्या के समाधान के लिए प्रधान ने एक व्यावहारिक व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया है। इसके तहत पहले पंचायत क्षेत्र के सभी उपभोक्ताओं को एक–एक रिफिल किया हुआ सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद वितरण के दौरान शेष उपलब्ध सिलेंडरों के माध्यम से उन परिवारों के दूसरे खाली सिलेंडरों की रिफिलिंग की जाए, जिन्हें इसकी आवश्यकता है। इससे सभी परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर पहली रिफिल मिलने के साथ–साथ दूसरे सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
प्रधान ने सहायक आयुक्त से आग्रह किया है कि ग्रामीण परिवारों की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए CCS प्रबंधन को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि लंबे समय से चली आ रही LPG सिलेंडर की समस्या का प्रभावी समाधान किया जा सके।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक हस्तक्षेप पर टिकी है, ताकि उन्हें रसोई गैस की नियमित उपलब्धता मिल सके और भविष्य में आपूर्ति में होने वाली देरी के कारण ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।















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