Editor: Pankaj Singh
नई दिल्ली- नीति आयोग, नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक नीति आयोग के माननीय उपाध्यक्ष श्री अशोक कुमार लाहिड़ी की अध्यक्षता में हुई। इसमें नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. सुब्रह्मण्यम, नीति आयोग के सीईओ श्री अनुराग जैन, और अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के मुख्य सचिव श्री ज्ञानेश भारती मौजूद थे। इनके अलावा, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों—नागरिक उड्डयन, स्वास्थ्य, जल शक्ति, पर्यटन, पोत परिवहन, मत्स्य पालन, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, और विद्युत—के सचिव भी इसमें शामिल हुए। बैठक में नीति आयोग तथा अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस बैठक में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के समग्र, समावेशी और रणनीतिक विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के माननीय उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा ने विभिन्न विकासात्मक पहलों की रूपरेखा बताते हुए एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह न केवल भारत की समुद्री सीमाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और समुद्री व्यापार के लिए भी एक अहम केंद्र हैं। लगभग 8,249 वर्ग किलोमीटर में फैले 31 बसे हुए द्वीपों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए, विकास नीतियों और योजनाओं को तैयार करते समय हर द्वीप की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
बैठक के दौरान, मुख्य भूमि से निर्माण सामग्री और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न योजनाओं के लागत मानदंडों और पात्रता शर्तों में उचित लचीलापन लाने का अनुरोध किया गया। साथ ही, ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित परियोजनाओं के महत्व पर भी चर्चा की गई।
कनेक्टिविटी के क्षेत्र में, उड़ानों की संख्या में कमी और हवाई किराए के अधिक होने का मुद्दा उठाया गया। इस बात पर जोर दिया गया कि नेशनल हाईवे-4 के अपग्रेडेशन और मिडिल स्ट्रेट ब्रिज के निर्माण में तेजी लाई जाए। साथ ही, सागरमाला 2.0 के तहत 13 जेटी (jetties) के पुनर्निर्माण और नियमित कार्गो जहाज सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
द्वीपवासियों के रोज़मर्रा के जीवन से सीधे जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई, जिनमें शामिल हैं: ‘जल जीवन मिशन’ के तहत पानी की पुरानी पाइपलाइनों को बदलना, 265 गांवों में पानी के भंडारण और वितरण प्रणालियों में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, ANIIMS में जरूरी चिकित्सा पदों का सृजन, MRI सुविधाओं का विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना।

द्वीप की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उद्देश्य से, गहरे समुद्र में टूना मछली पकड़ने के संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्थानीय रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने, तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, वाइपर द्वीप और स्वराज द्वीप पर पर्यटन विकास में तेजी लाने के लिए विशेष चर्चाएं की गईं। इसके अलावा, कृषि, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं, कृषि के मशीनीकरण और PMGSY-IV के तहत ग्रामीण सड़कों के लंबित प्रस्तावों से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिलाया गया।
माननीय उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा जी ने कहा कि हमारा उद्देश्य स्पष्ट है—अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप एक एकीकृत, टिकाऊ और समयबद्ध विकास मॉडल तैयार करना। नीति आयोग और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से आग्रह किया गया है कि वे लंबित प्रस्तावों पर समयबद्ध निर्णय लें, योजनाओं में उचित लचीलापन रखें, नोडल जिम्मेदारियां स्पष्ट करें और नियमित रूप से उच्च-स्तरीय समीक्षा करें।
‘विकसित भारत @2047’ के विजन को पूरा करने की दिशा में, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को रणनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से मजबूत बनाना हमारी सामूहिक प्राथमिकता है। लोक निवास की एक प्रेस विज्ञप्ति में यह बात कही गई है।















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